5 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करने जा रही हैं. बजट को लेकर आम आदमी से लेकर उद्योग जगत और नौकरीपेशा वर्ग को तमाम उम्मीदें हैं. मोदी सरकार ने बजट को लेकर कई परंपराओं को बदला है. पहले फरवरी के अंतिम दिन बजट पेश होता था, जिसे बदलकर अब 1 फरवरी कर दिया गया है. इसके अलावा रेल बजट को भी खत्म करके आम बजट में शामिल कर दिया गया. 

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बजट की परंपरा में बदलाव केवल मोदी सरकार ने ही नहीं किया है. इससे पहले भी इसे लेकर कई बड़े बदलाव हुए हैं. मसलन, बजट पेश होने के समय की ही बात करें तो किसी समय यह शाम 5 बजे पेश होता था. लेकिन इसके समय को बदल कर शाम 5 बजे की जगह सुबह 11 बजे कर दिया गया.

समय में हुआ बदलाव

बता दें कि वर्ष 2000 तक केंद्रीय बजट संसद में शाम 5 बजे पेश किया जाता था. बजट की घोषणा शाम 5 बजे किए जाने की परंपरा अंग्रेजों के समय से चली आ रही थी. लेकिन 2001 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने सुबह 11 बजे बजट पेश कर नई परंपरा शुरू की. उस समय भी अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार थी. यशवंत सिन्‍हा ने 7 बार देश का बजट पेश किया था. 

शाम को बजट पेश होने के पीछे बताया जाता है कि चूंकि यहां अंग्रेजों का शासन था और यहां के शासन की व्यवस्था ब्रिटेन से संचालित होती थी. ब्रिटेन में सुबह 11 बजे बजट पेश किया जाता था और इस बजट में भारत का बजट भी शामिल था. बजट की संतुति के लिए भारत की संसद में भी बजट पास होना जरूरी था, इसलिए ब्रिटेन में सुबह बजट पेश होने के बाद भारत में शाम 5 बजे उसे पेश करके पारित किया जाता था. जिस समय भारत में बजट पेश हो रहा होता था, ब्रिटेन में सुबह के 11.30 बज रहे होते थे.

लेकिन 2001 में इस परंपरा को खत्म करके सुबह 11 बजे बजट किया जाने लगा.