दिसंबर के महीने में सर्दी काफी बढ़ जाती है. हम सभी जानते हैं कि ठंड के दिनों में दिन छोटे हो जाते हैं और रातें लंबी होती हैं. लेकिन दिसंबर में एक दिन ऐसा होता है, जिस दिन वर्ष की सबसे लंबी रात होती है और सबसे छोटा दिन होता है. भौगोलिक भाषा में इसे शीतकालीन अयनांत (Winter Solstice) जाता है. आमतौर पर ये दिन 21 या 22 दिसंबर को पड़ता है. इस बार साल का सबसे छोटा दिन 21 दिसंबर शनिवार को है. जानिए हर साल ये खगोलीय घटना क्‍यों घटती है.

जानिए क्‍यों घटती है ये घटना

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विंटर सोल्सटिस उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों की आधिकारिक शुरुआत मानी जाती है. इस दिन मकर रेखा पृथ्‍वी के सबसे पास होती है. इस कारण से दिन की अवधि कम होती है. लेकिन इसके अगले दिन यानी 22 दिसंबर से दिन धीरे-धीरे बड़े होने शुरू हो जाएंगे. यह तब होता है जब पृथ्वी की उत्तरी धुरी सूर्य से दूर झुक जाती है. विंटर  सोल्सटिस  के दौरान दक्षिणी गोलार्द्ध में सूर्य की किरणें अधिक पड़ती हैं, जबकि उत्तरी गोलार्द्ध में कम. इसके कारण उत्तरी गोलार्द्ध  में सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होती है.

वहीं दक्षिणी गोलार्द्ध में आज का दिन सबसे बड़ा और रात सबसे छोटी होती है. इस कारण अर्जेंटिना, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में इस दिन से गर्मी की शुरुआत हो जाती है. विंटर सोल्सटिस की तरह ही गर्मियों में समर सोल्सटिस भी होता है. ये जून में 21 से 22 तारीख के आस पास होता है और इसका प्रभाव से बिल्कुल उल्‍टा होता है. इस दिन उत्‍तरी गोलार्द्ध में साल का सबसे लंबा दिन होता है.

कहां से आया सोल्सटिस शब्‍द

सोल्सटिस एक लैटिन शब्द है, जिसके पहले भाग सोल का मतलब है सूर्य, जबकि दूसरे भाग सेस्टेयर का अर्थ है स्थिर खड़े रहना. इन दोनों शब्‍दों को मिलाकर सोल्सटिस  शब्द बना है. इसका मतलब है कि सूर्य अभी स्थिर है क्योंकि सोल्सटिस के वक्त सूर्य उत्तर या दक्षिण की तरफ अपनी दिशा बदलने से पहले कुछ पल के लिए ठहर जाता है. कुछ देशों में इसे त्‍योहार के तौर पर भी सेलिब्रेट किया जाता है.