Artificial Sweeteners: फूड रेगुलेटर ने Stakeholders के साथ एक बैठक की. इस बैठक में सभी से Artificial Sweeteners के इस्तेमाल की जानकारी मांगी है. FSSAI ने WHO की रिपोर्ट पर एक्शन लेते हुए सभी उपयोगकर्ताओं से जानकारी देने को कहा है. इसके साथ-साथ टेक्निकल कमेटी भी जांच कर रही है. मामले पर जल्द लिया जाएगा फैसला सरकार चाहती है कि  Artificial Sweeteners के इस्तेमाल से किसी को नुकसान न पहुंचे. इसको लेकर जल्द ही इसके इस्तेमाल पर रोक लगाई जाएगी. Beverage Association सूत्रों का कहना है कि WHO की रिपोर्ट वैज्ञानिक तथ्यों पर कम और अनुभव पर ज्यादा आधारित है. सभी रेग्युलेटरी अथॉरिटी से इसके लिए न्यायसंगत दिशा-निर्देश की मांग की जाएगी. इसको लेकर उपभोक्ता मामले विभाग भी लगातार नजर बनाए हुए है. FSSAI की जांच और रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया जाएगा. WHO ने लोगों को किया सावधान इसके पहले World Health Organization (WHO) ने  लोगों को सावधान किया है कि अगर आप चीनी का "शुगर फ्री" ऑप्शन का उपयोग करते हैं तो आपको कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं. WHO ने कहा कि अगर आप मोटापा कम करने या फिट रहने की कोशिश में बिना चीनी वाले मीठे को इस्तेमाल कर रहे है तो यह आपके लिए खतरनाक हो सकता है. रिसर्च के बाद WHO ने जारी की नई गाइडलाइंस हाल ही में हुई रिसर्च के बाद WHO ने नई गाइडलाइन जारी की हैं. रिसर्च के मुताबिक वजन घटाने और लाइफ स्टाइल वाली बीमारियों को काबू करने में Non-Sugar Sweeteners या आर्टिफिशियल स्वीटनर बेकार साबित हो रहे हैं.  बल्कि वो नुकसान कर रहे हैं. आर्टिफिशियल स्वीटनर असल में आपको मोटा बना सकते हैं या दिल की बीमारी दे सकते हैं. प्रकृति से मिलने वाले मीठे का करें उपयोग WHO ने नई गाइडलाइन में कहा कि लोगों को प्रकृति से मिलने वाले नेचुरल स्वीट का उपयोग करना चाहिए. जैसे फलों की मिठास,गन्ना आदि.  WHO के मुताबिक बचपन से ही खाने में मीठा कम करने की आदत डालनी चाहिए. नॉन शुगर स्वीटनर या आर्टिफिशियल स्वीटनर में कई पोषक तत्व नहीं होता. लंबे समय तक इन चीजों के इस्तेमाल से कोई फायदा नहीं होता. मोटापा तो बिल्कुल कम नहीं होता. हालांकि जो लोग डायबिटीज के मरीज हैं ये गाइडलाइन्स उनके लिए नहीं है. Diabetes के मरीजों को उनके आर्टिफिशियल स्वीटनर की रोजाना खुराक के बारे में जानकारी दी जाती है. लेकिन नो कैलोरी या जीरो कैलोरी वाले बाजार में मौजूद विकल्प ये नहीं बताते कि उनका रोजाना कितना सेवन करना चाहिए और ज्यादा सेवन से क्या नुकसान हो सकता है. आर्टिफिशियल स्वीटनर से होंगे बीमार अगर आप जानना चाहते हैं कि क्या आपका आर्टिफिशियल स्वीटनर ठीक है तो WHO के मुताबिक सभी बेकार हैं. लिस्ट के मुताबिक acesulfame K, aspartame, advantame, cyclamates, neotame, saccharin, sucralose, stevia and stevia derivatives इनमें से किसी से भी बना मीठा किसी काम का नहीं है. लोग इनसे बने प्रोडक्ट को जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं - सोचते हैं कि वो फिट होने का काम कर रहे हैं. लंबे समय तक ऐसा करने से उन्हें नुकसान हो जाता है. आर्टिफिशियल स्वीटनर से नहीं कम होगा मोटापा रिसर्च में पाया गया कि तीन महीने तक ऐसा मीठा इस्तेमाल करने से थोड़ा वजन घटा और कैलोरी कम हुई लेकिन शरीर में ग्लूकोज की मात्रा कम नहीं हुई, दिल की बीमारी में मदद नहीं मिली और ब्लड शुगर भी कम नहीं हुई. जिन लोगों ने 6-18 महीने तक ऐसा मीठा खाया, उनमें वज़न भी नहीं घटा. स्टडी में एक ग्रुप को आर्टिफिशियल स्वीटनर दिए गए जबकि दूसरे को उसकी जगह पानी दिया गया -  दोनों ग्रुप में कोई फर्क नहीं मिला. जिन लोगों को दस वर्ष तक Non-Sugar Sweeteners या आर्टिफिशियल स्वीटनर दिए गए, वो मोटे हो गए. गर्भवती महिलाओं को हो रही ज्यादा समस्या रिसर्च में पाया गया कि ऐसे लोग जो saccharin मिला मीठा खा रहे थे उनमें ब्लैडर कैंसर का खतरा बढ़ गया था.बच्चों में Non-Sugar Sweeteners देने से कोई फायदा नहीं हुआ.गर्भवती महिलाओं मे Non-Sugar Sweeteners  के इस्तेमाल से समय से पहले डिलीवरी होने के मामले ज्यादा पाए गए. शिशुओं में अस्थमा और एलर्जी की समस्याएं देखी गई. हालांकि गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज और आर्टिफिशियल स्वीटनर के इस्तेमाल के बीच कोई लिंक नहीं मिला. बच्चे हो रहे ज्यादा मोटापे के शिकार WHO के मुताबिक 2020 में दुनिया में 5 वर्ष से कम के मोटे बच्चों की तादाद लगभग 4 करोड़ थी. ऐसे में बहुत बड़ी आबादी डायबिटीज के खतरे में है या मोटापा कम करने के चक्कर में है. मोटापे की वजह से 2017 में 40 लाख लोग मारे गए थे. 2020 में दुनिया में कुल साढ़े 5 करोड़ मौतों में से 4 करोड़ से ज्यादा केवल लाइफस्टाइल वाली बीमारियों से हो गई.  मोटापे का ऐसी बीमारियों से सीधा लिंक है. मार्केट में धड़ल्ले से बेची जी रही आर्टिफिशियल स्वीटनर आर्टिफिशियल स्वीटनर को स्वास्थ्य  वर्धक बता कर बेचा जाता है. बाजार में टूथपेस्ट से लेकर माउथवॉश और पैकेज्ड फूड सब में ये मिलाया जा रहा है जिससे लोग इसे सेहतमंद समझें. ऐसे में लोगों को ये भी पता नहीं चल पाता कि वो कितना मीठा खा गए हैं - या वो इस भ्रम में रह जाते हैं कि वो चीनी नहीं खा रहे इसलिए नुकसान नहीं होगा.