गन्रौर में बना एशिया का सबसे बड़ा हॉर्टिकल्चर मार्केट, किसानों को मिलेंगी इंटरनेशनल सुविधाएं
ये मार्केट एशिया का सबसे बड़ा बागवानी मार्केट होगा. इसके निर्माण में 1500 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.
सोनीपत जिले (Sonipat district) में के गन्नौर में भारत अंतरराष्ट्रीय बागवानी बाजार (International Horticulture Market) बनकर लगभग तैयार हो गया है. इस साल अगस्त तक यह मार्केट शुरू हो जाएगा. खास बात ये है कि ये मार्केट एशिया का सबसे बड़ा बागवानी मार्केट होगा. इसके निर्माण में 1500 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. इस मार्केट में किसानों को इंटरनेशनल स्तर की तमाम सुविधाएं मिलेंगी.
हरियाणा (Haryana) के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि गन्नौर (Ganaur) स्थित भारत अंतरराष्ट्रीय बागवानी बाजार (IIHM) में फल एवं सब्जी टर्मिनल इस साज अगस्त तक काम शुरू कर देगा. उन्होंने बताया कि इसके तहत प्रथम चरण में 196 मीटर लंबा और 56 मीटर चौड़ा शेड बनकर तैयार है और इस शेड में 48 दुकानें शुरू की जाएंगी.
मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा कि यहां व्यापारियों के लिए सभी सुविधाओं से युक्त दुकानें, माल लेकर आने वालों के ठहरने की व्यवस्था, पार्किंग की व्यवस्था सहित अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी. उन्होंने कहा कि अप्रैल तक निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा. अगले दो माह में मंडी के लिए नीति तैयार कर आवंटन तथा अन्य कार्य पूरे कर लिए जाएंगे और अगस्त से कारोबार शुरू हो जाएगा.
ज़ी बिज़नेस LIVE TV देखें:
537 एकड़ में फैले इस इंटरनेशनल मार्केट (Horticulture Market) में उत्पादकों को उनके फलों, सब्जियों, फूलों, मुर्गी पालन और डेयरी उत्पादों के लिए स्टोरेज व दूसरी सुविधाएं दी जाएंगी. यह मार्केट हब-एंड-स्पोक मॉडल पर काम करेगा. इस मार्केट में 2 करोड़ टन फल, सब्जी, फूल और डेयरी उत्पादन को हैंडल करने की क्षमता के लिए तैयार किया गया है. इसको बनाने में 1500 करोड़ रुपये की लागत आई है. इस मार्केट में वेयरहाउस, कोल्ड स्टोर, फल पकाने वाले स्टोर और स्टोरेज शेड्स होंगे.
किसान खुदे बेचेंगे अपना सामान
केंद्र सरकार ने किसानों को मजबूत बनाने और उनकी आमदनी बढ़ाने के मकसद से 10,000 नए किसान उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organization) बनाने के कार्यक्रम की भी शुरुआत की है. केंद्र सरकार ने अगले पांच साल में 10,000 नए एफपीओ बनाने का लक्ष्य रखा है. इस पूरे अभियान पर अगले पांच साल में 5,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. देश में छोटे जोत के आकार यानी कम जमीन वाले किसानों की आबादी अधिक है जो साधनहीन हैं लिहाजा सरकार ने उनको समूह में जोड़कर किसान उत्पादक संगठन बनाने का फैसला लिया है, ताकि फसलों के उत्पादन, प्रसंस्करण व व्यापार में किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए.